Badagaon Dhasan

सिद्ध क्षेत्र फलहोडी बडागांव धसान जैन मंदिर

पुराण साहित्य में इस तीर्थ को किसी ने ‘फलहोडी़’ किसी ने ‘बडागांव’ तथा किसी ने ‘फलहोड़ी बडागांव’ कहा है जबकि यह नाम एक ही स्थान के नाम है।

15 वीं शताब्दी के प्रसिद्ध विद्वान तथा मराठी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक भट्टारक गुणर्कीति ने तीर्थ वन्दना में लिखा है- ‘‘फलहोड़ी गा्रम आहूट कोटि सिद्धासि नमस्कार माझा’’ अर्थात् फलहोड़ी फलवर्ती बडागांव से साढे तीन कोटि मुनि मोक्ष पधारे,उन्हे नमस्कार।

प्राकृत निर्वाण काण्ड में ‘‘फलहोड़ी बडाग्रामे पश्चिम भायम्भि द्रोणगिरि सिहारे ’’(गाथा 14 का अंश) इसमें फलहोड़ी बडागांव एक ही बतलाकर स्थिति साफ कर दी, साथ ही दिशा- निर्देश भी कर दिया कि बडागांव द्रोणगिरि से पश्चिम में है। भाषा निर्वाण काण्ड ‘‘फलहोड़ी बडागांव अनूप पश्चिम दिशा द्रोणगिरि रूप’(गाथा 19 का अंश) इसमें अनुपम फलहोड़ी फलवर्ती बडागांव को द्रोणगिरि की उपमा देकर पश्चिम दिशा में होने का स्पष्ट निर्देश किया है।
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यह मंदिर कोटि पर्वत पर स्थित है, यह वही पर्वत है जो सिद्ध पुरुषों की निर्वाण स्थली रही है |

यह पर्वतों की श्रंखला धौरिगढ़ किले से शुरू होके जैन मंदिर, भद्र काली मंदिर और अतिशय क्षेत्र दरगुआ तक मिलता है |

10 वी शताब्दी की आदिनाथ भगवान की प्रतिमा व चौबीसी

यह प्रतिमा यहाँ की मूलनायक मानी जाती है | आज यह प्रतिमा नेमिनाथ जिनालय में विराजमान है |

भगवान पदमप्रभु

भगवान महावीर

भगवान चंद्रप्रभु

भगवान महावीर

भगवान पारसनाथ

भगवान बाहुबली, आदिनाथ, भरत

भगवान नेमिनाथ

भगवान आदिनाथ (बडागांव के बड़े बाबा)

यह प्रतिमा 11 फुट उतंग है व विराजमान कमल के साथ इसकी ऊँचाई साढ़े सोलह फुट हो जाती है |

पंचकल्याणक २०१३ के बाद से यह मंदिर पूरी तरह तैयार हो गया है | इसकी प्रसिद्धि के कारण दूर दूर से लोग दर्शन से लिए आते हैं |